उत्तराखंड में सड़क की बदहाली पर ग्रामीणों का पलटवार..

उत्तराखंड में सड़क की बदहाली पर ग्रामीणों का पलटवार..

 

 

 

उत्तराखंड: सरकारी दफ्तरों के चक्कर, अधिकारियों को दिए ज्ञापन और जनप्रतिनिधियों से मिले आश्वासनों के बावजूद जब सड़क गांव तक नहीं पहुंची तो ग्रामीणों ने इंतजार छोड़कर खुद ही रास्ता बनाने का फैसला कर लिया। ये मामला कर्णप्रयाग के सकंड गांव का है, जहां ग्रामीण गैंती, फावड़ा और बेलचे लेकर सड़क की कटिंग में जुटे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से सड़क की मांग उठाने के बावजूद उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिलते रहे।

रोज 9 किलोमीटर पैदल सफर की मजबूरी

सकंड गांव के लोगों के लिए सड़क सुविधा का अभाव रोजमर्रा की बड़ी चुनौती बन चुका है। ग्रामीणों के मुताबिक जरूरी काम के लिए उन्हें करीब नौ किलोमीटर तक पैदल सफर करना पड़ता है। बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए भी रोज लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। सबसे मुश्किल हालात तब पैदा होते हैं जब गांव में कोई बीमार पड़ता है। बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को इलाज के लिए ले जाने में परिजनों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। ग्रामीणों का दावा है कि कई गंभीर मरीजों को कंधों पर उठाकर पैदल ले जाना पड़ा और कुछ मामलों में समय पर इलाज नहीं मिलने से रास्ते में ही मौत तक हो चुकी है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क निर्माण के लिए उन्होंने कई स्तरों पर अपनी बात रखी। प्रशासन को पत्र दिए गए, अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाए गए और जनप्रतिनिधियों से भी सड़क निर्माण की मांग की गई। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क को लेकर कई बार सर्वे भी किए गए, लेकिन धरातल पर निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका।

सड़क की मांग को लेकर ग्रामीणों ने आंदोलन भी किया। इस दौरान क्षेत्रीय विधायक अनिल नौटियाल की ओर से सड़क के सर्वे और निर्माण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का आश्वासन मिलने की बात ग्रामीणों ने कही थी। ग्रामीणों के मुताबिक उन्हें तीन महीने के भीतर सर्वे और इसके बाद सड़क की कटिंग शुरू होने की उम्मीद थी, लेकिन तय समय गुजरने के बाद भी मौके पर काम शुरू नहीं हुआ। लगातार आश्वासनों के बावजूद सड़क का काम शुरू नहीं होने पर ग्रामीणों ने अब खुद ही सड़क बनाने का फैसला किया। वायरल हो रहे वीडियो में गांव के लोग गैंती, फावड़ा और बेलचे लेकर रास्ता तैयार करते नजर आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब सरकारी तंत्र से उन्हें मदद नहीं मिली तो उन्होंने अपने स्तर पर रास्ता तैयार करने की पहल की है। उनका यह कदम क्षेत्र में सड़क सुविधा को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

चुनाव बहिष्कार की चेतावनी

ग्रामीणों ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर आगामी विधानसभा चुनाव से पहले गांव को सड़क से नहीं जोड़ा गया तो वे चुनाव का बहिष्कार कर सकते हैं। उनका कहना है कि वर्षों से सड़क का इंतजार कर रहे ग्रामीणों को अब आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर काम चाहिए। सकंड गांव के ग्रामीणों का खुद सड़क निर्माण में जुटने का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। वीडियो ने पहाड़ी क्षेत्रों में आज भी सड़क और बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे ग्रामीण इलाकों की स्थिति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।