44 तरह की मुफ्त जांच और मोबाइल मेडिकल वैन..
उत्तराखंड की योजना समझने देहरादून पहुंची यूपी की टीम..
उत्तराखंड: निर्माण श्रमिकों को कार्यस्थल पर ही स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए उत्तराखंड में संचालित मुख्यमंत्री श्रमिक स्वास्थ्य सुरक्षा योजना दूसरे राज्यों का ध्यान आकर्षित कर रही है। इसी योजना की कार्यप्रणाली समझने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारियों की एक टीम देहरादून पहुंची। टीम ने योजना के तहत श्रमिकों की स्वास्थ्य जांच, मोबाइल मेडिकल वैन के संचालन और गंभीर मरीजों को उपचार के लिए अस्पताल भेजने की व्यवस्था की जानकारी ली। उत्तर प्रदेश के अपर श्रमायुक्त जुनैद अहमद के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल को उत्तराखंड के श्रम विभाग के अधिकारियों ने योजना के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया। इस दौरान श्रमिकों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए अपनाई जा रही व्यवस्थाओं पर भी चर्चा हुई।
कार्यस्थल पर ही उपलब्ध हो रही स्वास्थ्य सुविधाएं
मुख्यमंत्री श्रमिक स्वास्थ्य सुरक्षा योजना की शुरुआत 23 जुलाई को देहरादून स्थित मुख्य सेवक सदन से की गई थी। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने दो मोबाइल मेडिकल वैन को रवाना कर इस पहल की शुरुआत की थी। योजना का उद्देश्य निर्माण कार्यों में लगे श्रमिकों को उनके कार्यस्थल पर ही स्वास्थ्य जांच और प्राथमिक चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध कराना है। इसके तहत मोबाइल मेडिकल वैन निर्माण स्थलों, क्रशर और श्रमिकों के निवास वाले क्षेत्रों तक पहुंचती हैं। इससे मजदूरों को स्वास्थ्य जांच के लिए काम छोड़कर दूर स्थित अस्पतालों या स्वास्थ्य केंद्रों तक जाने की जरूरत कम होती है। मोबाइल मेडिकल वैन के माध्यम से श्रमिकों को एक्स-रे, ईसीजी सहित कुल 44 प्रकार की स्वास्थ्य जांच निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। जांच के साथ चिकित्सकीय परामर्श और जरूरत के अनुसार दवाइयां भी उपलब्ध कराई जाती हैं। योजना के तहत जांच के दौरान किसी बीमारी के संकेत मिलने पर संबंधित श्रमिक को आगे के उपचार के लिए उचित स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल भेजने की व्यवस्था भी की गई है। इसका उद्देश्य बीमारियों की समय रहते पहचान करना और श्रमिकों को उपचार उपलब्ध कराने में मदद करना है।
अब तक करीब 60 हजार श्रमिकों की जांच
उत्तराखंड के श्रमायुक्त एवं भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के सचिव प्रकाश चंद्र दुम्का ने उत्तर प्रदेश की टीम को योजना के संचालन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 60 हजार पंजीकृत निर्माण श्रमिकों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है। अधिकारियों के अनुसार, उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग और विभिन्न विभागों के समन्वय से योजना को संचालित किया जा रहा है। कार्यस्थल पर जांच की सुविधा मिलने से श्रमिकों को समय पर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का पता लगाने और उपचार के लिए उचित सलाह प्राप्त करने में मदद मिल रही है।
रजिस्ट्रेशन से लेकर अस्पताल रेफरल तक की जानकारी ली
उत्तर प्रदेश के अधिकारियों ने योजना के संचालन से जुड़ी प्रक्रियाओं का भी अध्ययन किया। उत्तराखंड के उप श्रमायुक्त विपिन कुमार और वरिष्ठ तकनीकी विशेषज्ञ दुर्गा चमोली ने टीम को श्रमिकों के पंजीकरण एवं सत्यापन, मोबाइल वैन के जरिए स्वास्थ्य शिविर लगाने, डिजिटल जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने और गंभीर मरीजों को अस्पताल रेफर करने की प्रक्रिया समझाई। टीम ने इस व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं को जाना और उत्तर प्रदेश में भी इसी तरह की पहल लागू करने की संभावनाओं पर चर्चा की। उत्तराखंड में कार्यस्थल पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की यह पहल निर्माण श्रमिकों की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। मोबाइल मेडिकल वैन के जरिए जांच की सुविधा उपलब्ध कराने से उन श्रमिकों को विशेष लाभ मिल सकता है, जो काम की व्यस्तता या अन्य कारणों से नियमित स्वास्थ्य जांच नहीं करा पाते। उत्तर प्रदेश की टीम का दौरा दोनों राज्यों के बीच श्रम कल्याण से जुड़ी योजनाओं के अनुभव साझा करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। योजना के संचालन और इसके परिणामों का अध्ययन दूसरे राज्यों में भी श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था तैयार करने में उपयोगी साबित हो सकता है।
