ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए हर जिले में मॉडल सहकारिता गांव..

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए हर जिले में मॉडल सहकारिता गांव..

 

 

 

 

उत्तराखंड: प्रदेश में सहकारिता तंत्र को नई मजबूती देने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है। योजना के तहत उत्तराखंड के प्रत्येक जिले में एक-एक मॉडल सहकारिता गांव विकसित किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी पहल को जल्द लागू करने के उद्देश्य से सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने विभागीय अधिकारियों को विस्तृत कार्ययोजना और समयबद्ध रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए हैं। हाल ही में आयोजित विभागीय समीक्षा बैठक में मंत्री ने स्पष्ट किया कि इन मॉडल गांवों को संस्कृत गांव की तर्ज पर विकसित किया जाएगा, जहां सहकारी ढांचे को समेकित रूप में मजबूत किया जाएगा। प्रस्तावित मॉडल सहकारिता गांवों में सहकारी बैंक, कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) और सहकारी बाजार जैसी सुविधाएं स्थापित की जाएंगी।

सहकारी बाजार के माध्यम से स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों, किसान संगठनों और ग्रामीण उत्पादकों को अपने उत्पादों की बिक्री के लिए सशक्त मंच उपलब्ध कराया जाएगा। इससे स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार मिलेगा और ग्रामीण स्तर पर आय के नए अवसर सृजित होंगे। मंत्री ने कहा कि इस पहल का मूल उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना, स्वरोजगार और रोजगार के अवसर बढ़ाना तथा सहकारिता आधारित आत्मनिर्भर मॉडल को बढ़ावा देना है। उनका मानना है कि यह योजना आने वाले समय में प्रदेश में समावेशी और सतत विकास की दिशा में एक प्रभावी उदाहरण साबित हो सकती है। सरकार की इस पहल को ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

प्रदेश में सहकारी समितियों को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार ने बहुआयामी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। विभागीय समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सहकारी समितियों के 50 सचिवों को अध्ययन भ्रमण के लिए गुजरात भेजा जाए। प्राथमिकता उन समितियों के सचिवों को दी जाएगी, जो अभी प्रारंभिक अवस्था में कार्य कर रही हैं। उद्देश्य यह है कि वे सफल सहकारी मॉडलों का अध्ययन कर अपने-अपने क्षेत्रों में बेहतर कार्यप्रणाली लागू कर सकें। होली के बाद संयुक्त निबंधक, अपर निबंधक और प्रभारी अधिकारी ब्लॉक स्तर पर समीक्षा बैठकें आयोजित करेंगे। घाटे में संचालित हो रही समितियों के लिए जमीनी स्तर पर रणनीति तैयार कर ठोस कार्ययोजना लागू की जाएगी। साथ ही सभी पैक्स (PACS) और एपेक्स समितियों की नियमित बोर्ड बैठकें अनिवार्य कर दी गई हैं, ताकि प्रशासनिक सक्रियता और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित हो सके।

सहकारी समितियों और सहकारी बैंकों में नियुक्तियों को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए निर्देश दिए गए हैं कि शत-प्रतिशत भर्ती Institute of Banking Personnel Selection (आईबीपीएस) के माध्यम से कराई जाए। 15 मार्च तक भर्ती विज्ञापन जारी करने की समयसीमा भी तय की गई है, ताकि प्रक्रिया में देरी न हो और योग्य अभ्यर्थियों को समान अवसर मिल सके। सहकारिता आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने के लिए योजनाओं और उपलब्धियों का प्रचार-प्रसार सोशल मीडिया के माध्यम से किया जाएगा। स्थानीय बोली-भाषाओं में जानकारी साझा करने पर विशेष जोर रहेगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़े और अधिक से अधिक लोग सहकारिता से जुड़ सकें। सरकार का मानना है कि इन पहलों से सहकारी ढांचा अधिक मजबूत, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनेगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकेगी।