उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की तैयारियां तेज़ हो गई हैं। हरिद्वार को छोड़कर बाकी 12 जिलों में आरक्षण प्रस्तावों के अनंतिम प्रकाशन के बाद अब तक तीन हजार से अधिक आपत्तियां दर्ज की गई हैं। इन आपत्तियों का निस्तारण 10 और 11 जून को जिलाधिकारियों द्वारा किया जाएगा। इसके बाद 18 जून को आरक्षण प्रस्तावों की अंतिम सूची प्रकाशित की जाएगी।
अधिकतर आपत्तियों में ग्रामीणों ने यह सवाल उठाया है कि पिछली बार भी उनकी ग्राम पंचायत महिला के लिए आरक्षित थी, और इस बार फिर से वही आरक्षण दे दिया गया है। कुछ लोगों ने मांग की है कि उनके क्षेत्र को अनुसूचित जाति (SC) और जनजाति (ST) के लिए आरक्षित न करके सामान्य किया जाए, जबकि कुछ ने अपने क्षेत्रों को SC, ST या OBC वर्ग के लिए आरक्षित करने की अपील की है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पंचायतों का आरक्षण पूरी तरह शासनादेश के अनुसार किया गया है और सभी आपत्तियों पर निष्पक्ष तरीके से विचार किया जा रहा है।
जिलावार आंकड़ों की बात करें तो सबसे अधिक आपत्तियां ऊधमसिंह नगर से मिली हैं, जहां 800 से अधिक शिकायतें आई हैं। इसके अलावा देहरादून में 302, अल्मोड़ा में 294, पिथौरागढ़ में 277, चंपावत में 337, पौड़ी में 354, चमोली में 213, रुद्रप्रयाग में 90, उत्तरकाशी में 383 और टिहरी में 297 आपत्तियां प्राप्त हुई हैं। इन सभी आपत्तियों पर प्रशासन द्वारा गंभीरता से कार्यवाही की जा रही है ताकि आरक्षण प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे।
