किसाऊ बांध का रास्ता साफ, उत्तराखंड को मिलेगी बिजली और सिंचाई की बड़ी सौगात..

किसाऊ बांध का रास्ता साफ, उत्तराखंड को मिलेगी बिजली और सिंचाई की बड़ी सौगात..

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड के ऊर्जा और जल संसाधन क्षेत्र के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित किसाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना अब धरातल पर उतरने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ती नजर आ रही है। वर्षों से विभिन्न राज्यों के बीच लागत, जल बंटवारे और बिजली हिस्सेदारी को लेकर चली आ रही असहमति के बाद आखिरकार बड़ा समाधान निकल आया है। केंद्र सरकार की पहल पर उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के बीच परियोजना को लेकर व्यापक सहमति बन गई है। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में परियोजना से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर निर्णय लिए गए। बैठक के बाद सभी संबंधित राज्यों ने परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने की सहमति जताई है। एमओयू प्रक्रिया पूरी होने के बाद परियोजना को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

टोंस नदी पर प्रस्तावित यह बहुउद्देशीय परियोजना उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा क्षेत्र में विकसित की जानी है। टोंस नदी को यमुना की सबसे बड़ी सहायक नदी माना जाता है और इस परियोजना का महत्व पूरे यमुना बेसिन के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। करीब 15 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना का उद्देश्य केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से जल संरक्षण, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, पेयजल उपलब्धता में सुधार और नदी के पर्यावरणीय प्रवाह को बनाए रखने जैसे कई महत्वपूर्ण लक्ष्य पूरे किए जाने हैं। परियोजना के तहत लगभग 422 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन क्षमता विकसित की जाएगी। इससे उत्तराखंड को अपने हिस्से की अतिरिक्त बिजली प्राप्त होगी, जो राज्य की लगातार बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक साबित हो सकती है। साथ ही जलविद्युत उत्पादन से राज्य को अतिरिक्त राजस्व अर्जित होने की संभावना भी बढ़ेगी।

सिंचाई और जल प्रबंधन के दृष्टिकोण से भी यह परियोजना उत्तराखंड के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बांध निर्माण के बाद यमुना बेसिन में जल भंडारण क्षमता बढ़ेगी, जिससे कम वर्षा अथवा सूखे जैसी परिस्थितियों में भी पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा। इसका सीधा लाभ किसानों और कृषि क्षेत्र को मिलेगा। कई क्षेत्रों में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार संभव होगा, जबकि भविष्य की पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने में भी यह परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। बैठक में परियोजना की वित्तीय व्यवस्था को लेकर भी अहम निर्णय लिया गया। तय किया गया है कि जल घटक से संबंधित लागत का 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार केंद्रीय सहायता के रूप में वहन करेगी, जबकि शेष 10 प्रतिशत राशि संबंधित राज्यों द्वारा साझा की जाएगी। इस व्यवस्था से राज्यों पर आर्थिक बोझ कम होगा और परियोजना को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसाऊ परियोजना यमुना नदी के संरक्षण और पुनर्जीवन में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। नियंत्रित जल प्रवाह और पर्यावरणीय आवश्यकताओं के अनुरूप पानी छोड़े जाने से नदी की जल गुणवत्ता में सुधार आने की संभावना है। इसका लाभ यमुना बेसिन के निचले क्षेत्रों में रहने वाली बड़ी आबादी को मिल सकता है। उत्तराखंड सरकार भी इस परियोजना को राज्य के दीर्घकालिक विकास से जोड़कर देख रही है। बढ़ती बिजली मांग, कृषि क्षेत्र की जरूरतों और भविष्य की जल सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किसाऊ बांध परियोजना को राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर पहल माना जा रहा है। केंद्र और राज्यों के बीच बनी नई सहमति के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि वर्षों से लंबित यह महत्वाकांक्षी परियोजना जल्द ही निर्माण चरण में प्रवेश करेगी और उत्तराखंड को ऊर्जा, सिंचाई तथा जल प्रबंधन के क्षेत्र में बड़ा लाभ मिलेगा।