उत्तराखंड में एस्ट्रो टूरिज्म पर बड़ा फोकस, 422 युवाओं को मिल चुका है प्रशिक्षण..

उत्तराखंड में एस्ट्रो टूरिज्म पर बड़ा फोकस, 422 युवाओं को मिल चुका है प्रशिक्षण..

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में पर्यटन को नए आयाम देने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में राज्य सरकार लगातार प्रयासरत है। इसी कड़ी में उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड (यूटीडीबी) द्वारा संचालित एस्ट्रो टूर गाइड प्रशिक्षण कार्यक्रम तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह पहल न केवल राज्य में पर्यटन गतिविधियों को विविधता प्रदान कर रही है, बल्कि युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने का भी प्रभावी माध्यम बन रही है। हाल ही में आयोजित एस्ट्रो टूर गाइड प्रशिक्षण कार्यक्रम में पर्यटन विभाग के अधिकारियों, पर्यटन विशेषज्ञों, प्रशिक्षकों और प्रशिक्षुओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान एस्ट्रो टूरिज्म की संभावनाओं, इसके आर्थिक प्रभाव और राज्य में इसके विस्तार को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम में पर्यटन विकास बोर्ड की अतिरिक्त निदेशक पूनम चंद मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। उनके साथ पर्यटन एवं आतिथ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भी प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।

कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से आए लगभग 80 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें रामनगर, नैनीताल और काशीपुर में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों के वर्तमान एवं पूर्व प्रशिक्षु शामिल रहे। प्रतिभागियों को खगोल विज्ञान की बुनियादी जानकारी देने के साथ-साथ रात्रिकालीन आकाश अवलोकन, तारों और ग्रहों की पहचान, टेलीस्कोप संचालन तथा पर्यटकों को वैज्ञानिक तथ्यों को रोचक ढंग से प्रस्तुत करने का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड में एस्ट्रो टूरिज्म की संभावनाएं बेहद व्यापक हैं। राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में स्वच्छ वातावरण, कम प्रकाश प्रदूषण और साफ आसमान जैसी प्राकृतिक विशेषताएं मौजूद हैं, जो खगोलीय गतिविधियों के लिए आदर्श परिस्थितियां उपलब्ध कराती हैं। यही कारण है कि आने वाले वर्षों में एस्ट्रो टूरिज्म उत्तराखंड की पर्यटन अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।

अतिरिक्त निदेशक पूनम चंद ने कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम देश में अपनी तरह की एक अभिनव पहल है और उत्तराखंड इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य युवाओं को ऐसे कौशल प्रदान करना है, जिनके माध्यम से वे स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर विकसित कर सकें। इससे पलायन की समस्या को कम करने में भी मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि एस्ट्रो टूरिज्म केवल पर्यटन गतिविधि नहीं, बल्कि विज्ञान और प्रकृति को जोड़ने वाला एक ऐसा माध्यम है, जो पर्यटकों को एक नया और अनूठा अनुभव प्रदान करता है। इस क्षेत्र में प्रशिक्षित गाइड पर्यटकों को रात के आसमान, ग्रहों, नक्षत्रों और खगोलीय घटनाओं के बारे में जानकारी देकर पर्यटन अनुभव को और अधिक आकर्षक बना सकते हैं।

उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड की ओर से शुरू किया गया यह प्रशिक्षण कार्यक्रम तीन अक्टूबर 2025 को देहरादून से प्रारंभ हुआ था। तब से लेकर अब तक राज्य के विभिन्न जिलों में कुल 422 युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले कई युवा अब स्थानीय स्तर पर एस्ट्रो टूरिज्म आधारित गतिविधियों और पर्यटन सेवाओं से जुड़कर अपनी पहचान बना रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कॉर्बेट लैंडस्केप, कुमाऊं क्षेत्र और गढ़वाल मंडल के कई ऊंचाई वाले इलाके भविष्य में एस्ट्रो टूरिज्म के प्रमुख केंद्र बन सकते हैं। यदि प्रशिक्षित गाइडों का मजबूत नेटवर्क विकसित किया जाता है, तो इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन आधारित रोजगार बढ़ेगा, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और राज्य में सतत पर्यटन विकास को नई दिशा प्राप्त होगी। पर्यटन विभाग का मानना है कि एडवेंचर, इको और वेलनेस टूरिज्म की तरह एस्ट्रो टूरिज्म भी उत्तराखंड को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यही कारण है कि विभाग इस क्षेत्र में प्रशिक्षण, जागरूकता और बुनियादी सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दे रहा है।