उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में भर्ती अभियान तेज, शिक्षकों के साथ चतुर्थ श्रेणी पद भी भरेंगे..
उत्तराखंड: उत्तराखंड में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने की दिशा में शिक्षा विभाग ने बड़ी पहल शुरू कर दी है। प्रदेशभर के विद्यालयों में लंबे समय से खाली पड़े शिक्षकों के पदों को भरने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। विभाग की योजना के तहत 1500 से अधिक शिक्षकों की भर्ती की जाएगी, जबकि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव किया गया है। अब सरकारी इंटर कॉलेजों में खाली पड़े चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नियुक्ति का अधिकार सीधे प्रधानाचार्यों को दिया जाएगा। शिक्षा विभाग के अनुसार माध्यमिक और प्रारंभिक शिक्षा दोनों स्तरों पर रिक्त पदों को भरने की तैयारी अंतिम चरण में है। इससे सरकारी विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने और छात्रों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
808 प्रवक्ता पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी
प्रदेश के राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रवक्ता (लेक्चरर) के 808 पदों पर भर्ती प्रक्रिया पहले से जारी है। विभाग ने भर्ती एजेंसी से जल्द परिणाम जारी करने का आग्रह करने की बात कही है ताकि चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति समय पर की जा सके और विद्यालयों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी दूर हो सके।प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए 250 से अधिक सहायक अध्यापक (प्रारंभिक शिक्षा) के रिक्त पदों पर भी भर्ती की तैयारी पूरी कर ली गई है। विभाग जल्द ही इन पदों के लिए विज्ञापन जारी करेगा। भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद प्राथमिक विद्यालयों में लंबे समय से चल रही शिक्षकों की कमी काफी हद तक दूर होने की उम्मीद है। गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के सरकारी विद्यालयों में सहायक अध्यापक एलटी (Licensed Teacher) के 450 से अधिक पद भी रिक्त हैं। शिक्षा विभाग इन सभी पदों का प्रस्ताव तैयार कर भर्ती आयोग को भेजने की तैयारी कर रहा है। प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद इन पदों पर भी भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी।
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति का बदला सिस्टम
राजकीय इंटर कॉलेजों में 2364 चतुर्थ श्रेणी पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। पहले इन पदों को आउटसोर्सिंग के माध्यम से भरने की योजना बनाई गई थी और इसके लिए एजेंसी का चयन भी किया गया था। हालांकि प्रक्रिया के दौरान मिली शिकायतों के बाद इस व्यवस्था को रोक दिया गया। अब नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक सरकारी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य को अपने विद्यालय में आवश्यकतानुसार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति करने का अधिकार दिया जाएगा। नियुक्ति के दौरान स्थानीय निवासियों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही जिन परिवारों ने विद्यालय की स्थापना या विस्तार के लिए भूमि दान की है, उनके आश्रितों को भी प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया है।
शिक्षा विभाग केवल नई भर्ती पर ही नहीं, बल्कि लंबे समय से लंबित पदोन्नतियों पर भी तेजी से काम कर रहा है। विभाग की योजना के अनुसार सहायक अध्यापक एलटी से प्रवक्ता पद पर लगभग 3000 शिक्षकों की पदोन्नति की जानी है। इसके लिए पदोन्नति संबंधी प्रस्ताव राज्य लोक सेवा आयोग को भेजे जाएंगे। यदि आयोग की प्रक्रिया में अधिक समय लगता है तो विभाग शिक्षकों को तदर्थ (Adhoc) पदोन्नति देने का विकल्प अपनाएगा, ताकि स्कूलों में रिक्त पदों पर जल्द शिक्षकों की तैनाती सुनिश्चित की जा सके।शिक्षा विभाग का मानना है कि नई भर्तियों और लंबित पदोन्नतियों के बाद प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी काफी हद तक दूर होगी। इससे दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों के विद्यालयों में भी नियमित शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ेगी और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सकेगा। विभाग का लक्ष्य है कि रिक्त पदों को चरणबद्ध तरीके से भरकर सरकारी शिक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जाए।
